संक्षिप्त समाचार 25-06-2026

थेवा(Thewa)कला 

पाठ्यक्रम: जीएस-1/कला एवं संस्कृति 

सन्दर्भ

  • प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपनी हालिया स्लोवाकिया यात्रा के दौरान स्लोवाकिया के राष्ट्रपति को थेवा कला से निर्मित कफ़लिंक भेंट किए।

थेवा कला :परिचय

  • थेवा कला राजस्थान के प्रतापगढ़ की भारत की सर्वाधिक विशिष्ट पारम्परिक हस्तकलाओं में से एक है।
  • यह कला लगभग 400 वर्ष पुरानी है तथा इसकी उत्पत्ति मुगल काल से मानी जाती है।
  • यह रंगीन काँच पर की जाने वाली जटिल स्वर्ण नक्काशी के लिए प्रसिद्ध है।
  • इसमें 23 कैरेट सोने से अत्यंत बारीक आकृतियाँ बनाकर उन्हें बहुरंगी काँच की सतह पर जड़ा जाता है।
  • थेवा कला में अत्यधिक सूक्ष्मता एवं धैर्य की आवश्यकता होती है। एक सेट तैयार करने में लगभग तीन दिन का समय लगता है।
  • समय के साथ यह कला भारत की सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक बन गई है तथा इससे जुड़े शिल्पकारों के लिए आजीविका का महत्त्वपूर्ण स्रोत भी है।

स्रोत: DD

सुश्रुत

पाठ्यक्रम: जीएस-1/ कला एवं संस्कृति 

चर्चा में क्यों?

  • स्कॉटलैंड स्थित रॉयल कॉलेज ऑफ सर्जन्स ऑफ एडिनबर्ग ने लगभग 2,600 वर्ष पूर्व हुए प्राचीन भारतीय वैद्य सुश्रुत के सम्मान में उनकी प्रतिमा का अनावरण किया है।

सुश्रुत का परिचय

  • सुश्रुत प्राचीन भारत के महान वैद्य एवं शल्य चिकित्सक थे, जिन्हें शल्य चिकित्सा का जनक तथा प्लास्टिक सर्जरी का जनक माना जाता है।
  • वे उन्नत शल्य चिकित्सा तकनीकों, शरीर रचना विज्ञान के अध्ययन तथा व्यवस्थित चिकित्सीय शिक्षा के लिए प्रसिद्ध हैं।
  • उन्होंने पश्चिमी विश्व में इन विधियों के प्रचलित होने से कई शताब्दियों पूर्व ही जटिल शल्य क्रियाएँ सम्पन्न की थीं।
  • उनका चिकित्सीय ज्ञान सुश्रुत संहिता में संकलित है, जो चिकित्सा विज्ञान के सबसे प्राचीन एवं व्यापक ग्रंथों में से एक है।

सुश्रुत संहिता दो भागों में विभाजित है—

  • पूर्वतंत्र: शल्य चिकित्सा, शरीर रचना विज्ञान, कायचिकित्सा, बाल चिकित्सा तथा विष विज्ञान।
  • उत्तरतंत्र: नेत्र, कर्ण, नासिका एवं कण्ठ रोग, मनोचिकित्सा तथा वृद्धावस्था चिकित्सा।

प्रमुख योगदान

  • नाक पुनर्निर्माण (Rhinoplasty) के प्रवर्तक: ललाट अथवा गाल की त्वचा का उपयोग करके नाक के पुनर्निर्माण की तकनीक (Pedicle Flap) विकसित की।
  • शल्य चिकित्सा के आठ प्रकार (अष्टविध शस्त्रकर्म): काटकर निकालना(excision), चीरा लगाना(incision), खुरचना(scraping), वेधन(puncturing), जाँचना(probing), आहरण(extraction), विस्रावण(drainage) तथा टांके लगाना(suturing) सहित आठ श्रेणियों में वर्गीकृत किया।
  • जलन एवं आघात प्रबंधन: जलने तथा अन्य ऊष्मीय चोटों, जैसे लू (Heat Stroke) एवं शीतदंश (Frostbite), का वर्गीकरण किया।
  • जीवनशैली संबंधी रोग: मधुमेह, मोटापा एवं हृदय-वाहिका संबंधी रोगों से मिलती-जुलती अवस्थाओं का वर्णन करते हुए स्वास्थ्य में जीवनशैली के महत्त्व पर बल दिया।

स्रोत: TH

कैस्पियन सागर

पाठ्यक्रम : जीएस-1/भूगोल 

सन्दर्भ

  • 1990 के दशक के मध्य से अब तक कैस्पियन सागर का सतही क्षेत्रफल लगभग 24,000 वर्ग किलोमीटर घट चुका है, जो भूमध्य सागर के सबसे बड़े द्वीप सिसिली के क्षेत्रफल के लगभग बराबर है।

कैस्पियन सागर: परिचय

  • कैस्पियन सागर विश्व का सबसे बड़ा आंतरिक जल निकाय (Inland Water Body) है, जो यूरोप और एशिया के मध्य स्थित है।
  • इसकी सीमाएँ निम्नलिखित पाँच देशों से मिलती हैं यथा ;
  • रूस,कज़ाख़स्तान,तुर्कमेनिस्तान,ईरान अज़रबैजान।
  • ‘सागर’ कहलाने के बावजूद यह तकनीकी रूप से खारे जल की एक झील है, जिसका किसी महासागर से प्राकृतिक निकास नहीं है।
  • इसमें गिरने वाली प्रमुख नदियाँ हैं— वोल्गा नदी (सबसे बड़ी),यूराल नदी,कुरा नदी,तेरेक नदी।
  • यह क्षेत्र तेल एवं प्राकृतिक गैस के विशाल भंडारों से समृद्ध है, जिसके कारण इसका अत्यधिक सामरिक एवं आर्थिक महत्त्व है।

क्या आप जानते हैं?

  • वर्ष 2018 के अकताउ(Aktau) अभिसमय (Convention on the Legal Status of the Caspian Sea) के बावजूद, कैस्पियन सागर के लिए अब भी जल बँटवारे, जलवैज्ञानिक निगरानी तथा पारिस्थितिक संरक्षण संबंधी कोई व्यापक एवं प्रभावी कानूनी व्यवस्था उपलब्ध नहीं है।

स्रोत: DTE

कृत्रिम बुद्धिमत्ता पर स्वतंत्र अंतर्राष्ट्रीय वैज्ञानिक पैनल

पाठ्यक्रम: जीएस-3/ विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी 

सन्दर्भ

  • आईआईटी मद्रास के प्रोफेसर बी. रविन्द्रन को संयुक्त राष्ट्र द्वारा स्थापित कृत्रिम बुद्धिमत्ता पर स्वतंत्र अंतर्राष्ट्रीय वैज्ञानिक पैनल का सदस्य नियुक्त किया गया है।

कृत्रिम बुद्धिमत्ता पर स्वतंत्र अंतर्राष्ट्रीय वैज्ञानिक पैनल

  • यह कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) पर स्थापित विश्व का पहला वैश्विक वैज्ञानिक निकाय है, जो अग्रणी विशेषज्ञों को एक मंच पर लाकर यह मूल्यांकन करता है कि AI किस प्रकार मानव जीवन को परिवर्तित कर रही है।

उद्देश्य

  • वैश्विक वैज्ञानिक सहयोग को सुदृढ़ करना।
  • AI के उपयोग पर साक्ष्य-आधारित निष्कर्ष विकसित करना।
  • AI के सामाजिक, आर्थिक एवं नैतिक प्रभावों पर स्वतंत्र एवं बहु-विषयक विशेषज्ञता उपलब्ध कराकर अंतर्राष्ट्रीय शासन प्रयासों को समर्थन देना।

ट्रस्टेड एआई कॉमन्स (Trusted AI Commons)

  • ट्रस्टेड एआई कॉमन्स भारत के इंडियाएआई मिशन के अंतर्गत सुरक्षित एवं विश्वसनीय कृत्रिम बुद्धिमत्ता की व्यापक पहल का एक महत्त्वपूर्ण भाग है।
  • इसे उत्तरदायी कृत्रिम बुद्धिमत्ता के विकास एवं उपयोग हेतु डेटासेट, बेंचमार्क, परीक्षण उपकरण, प्रोटोकॉल तथा सर्वोत्तम कार्य-पद्धतियों के एक मुक्त भंडार (Open Repository) के रूप में विकसित किया जा रहा है।

वैश्विक कृत्रिम बुद्धिमत्ता शासन की आवश्यकता

  • विभिन्न देशों में अलग-अलग नियमों से उत्पन्न नियामकीय विखंडन को रोकने तथा AI के विकास एवं उपयोग हेतु समान वैश्विक मानक स्थापित करने के लिए।
  • यह सुनिश्चित करने के लिए कि सीमित नियामकीय क्षमता के कारण विकासशील देश हाशिए पर न चले जाएँ अथवा डिजिटल उपनिवेश न बन जाएँ।
  • साइबर हमलों, भ्रामक सूचना अभियानों तथा जैविक एवं रासायनिक हथियारों के विकास में AI के दुरुपयोग से उत्पन्न सीमा-पार जोखिमों का समाधान करने के लिए।
  • डेटा सम्प्रभुता की रक्षा करते हुए AI क्षमताओं का कुछ देशों एवं बड़ी कंपनियों तक सीमित केंद्रीकरण रोकने के लिए।
  • AI के लाभों तक समान पहुँच सुनिश्चित करने तथा समावेशी, उत्तरदायी एवं विश्वसनीय कृत्रिम बुद्धिमत्ता नवाचार को बढ़ावा देने के लिए।

स्रोत : IE, PIB, UN

भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा डिजिटल धोखाधड़ी क्षतिपूर्ति नियमों में संशोधन

पाठ्यक्रम : जीएस-3/ अर्थव्यवस्था 

सन्दर्भ

  • भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने डिजिटल भुगतान धोखाधड़ी के पीड़ितों के लिए संशोधित क्षतिपूर्ति व्यवस्था लागू की है तथा ग्राहकों की देयता सीमित करने संबंधी अपने ढाँचे का विस्तार किया है।

आरबीआई के ढाँचे में संशोधन की आवश्यकता

  • वर्ष 2017 में लागू वर्तमान व्यवस्था मुख्यतः अनधिकृत इलेक्ट्रॉनिक बैंकिंग लेन-देन, जैसे हैकिंग आदि, तक सीमित थी, जहाँ ग्राहक ने स्वयं लेन-देन की अनुमति नहीं दी होती थी।
  • वर्तमान में डिजिटल धोखाधड़ी का बड़ा हिस्सा सोशल इंजीनियरिंग के माध्यम से होता है, जिसमें ग्राहकों को धोखे, दबाव अथवा छल द्वारा स्वयं लेन-देन की स्वीकृति देने के लिए प्रेरित किया जाता है। संशोधित व्यवस्था का उद्देश्य ऐसी उभरती हुई धोखाधड़ी से निपटना है।

आरबीआई के संशोधित डिजिटल धोखाधड़ी क्षतिपूर्ति नियम

  • आरबीआई (RBI) ने धोखाधड़ीपूर्ण इलेक्ट्रॉनिक बैंकिंग लेन-देन की परिभाषा का विस्तार किया है, जिसमें अब निम्नलिखित भी शामिल हैं— धोखाधड़ी से प्राप्त ग्राहक पहचान विवरण (Credentials) का उपयोग करके किए गए लेन-देन,दबाव या जबरदस्ती में स्वीकृत लेन-देन,बैंक की लापरवाही अथवा तृतीय पक्ष की सुरक्षा चूक के कारण हुए अनधिकृत लेन-देन।

इस व्यवस्था में अब निम्न प्रकार की उभरती डिजिटल धोखाधड़ी भी सम्मिलित हैं—

  • डिजिटल गिरफ्तारी (Digital Arrest) घोटाले।
  • ओटीपी एवं बैंकिंग विवरणों की धोखाधड़ीपूर्ण प्राप्ति।
  • साइबर हमलों अथवा सुरक्षा उल्लंघनों के परिणामस्वरूप हुए अनधिकृत धन अंतरण।
  • क्षतिपूर्ति राशि: यदि किसी वास्तविक (Bona Fide) पीड़ित को धोखाधड़ीपूर्ण इलेक्ट्रॉनिक बैंकिंग लेन-देन से ₹50,000 तक की हानि होती है, तो उसे शुद्ध हानि का 85% अथवा ₹25,000 (जो भी कम हो) जीवनकाल में एक बार प्रदान किया जाएगा।
  • कुल क्षतिपूर्ति राशि का लगभग तीन-चौथाई भाग आरबीआई वहन करेगा, जबकि शेष राशि का आधा-आधा भाग ग्राहक के बैंक एवं लाभार्थी बैंक द्वारा वहन किया जाएगा।
  • क्षतिपूर्ति प्राप्त करने के लिए ग्राहक को पाँच कैलेंडर दिनों के भीतर राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज करनी होगी। निर्धारित समय-सीमा के भीतर संबंधित बैंक को भी सूचना देनी होगी।
  • यदि ग्राहक बैंक अथवा भुगतान मंच द्वारा जारी धोखाधड़ी संबंधी चेतावनियों की उपेक्षा करता है, तो वह क्षतिपूर्ति का पात्र नहीं होगा।
  • बैंक में मोबाइल नंबर अथवा ई-मेल पता अद्यतन न रखना भी लापरवाही माना जा सकता है, जिसके कारण क्षतिपूर्ति से वंचित किया जा सकता है।
  • ग्राहक द्वारा धोखाधड़ी की सूचना देने के बाद होने वाले किसी भी अनधिकृत लेन-देन को पूर्णतः निरस्त कर दिया जाएगा तथा ऐसी हानि के लिए ग्राहक की शून्य देयता (Zero Liability) होगी।

स्रोत: TH, IE

भारती (BHARATI) कार्यक्रम 

पाठ्यक्रम: जीएस-3/कृषि 

चर्चा में क्यों 

  • वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अधीन कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (APEDA) ने भारती कार्यक्रम के प्रथम चरण(cohort) का सफलतापूर्वक समापन किया।

भारती कार्यक्रम का परिचय

  • भारती (भारत हब फ़ॉर एग्रीटेक, रिजिलिएन्स,एडवांसमेंट एंड इन्क्यूबेशन फ़ॉर एक्सपोर्ट इनोवेशन), एपीडा(APEDA) का प्रमुख निर्यात संवर्धन कार्यक्रम है, जिसका उद्देश्य भारतीय कृषि-खाद्य नवप्रवर्तक उद्यमों को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी निर्यातक बनाना है।

उद्देश्य:

  • कृषि-खाद्य नवप्रवर्तक उद्यमों में ‘निर्यात-प्रथम’ (Export-first) दृष्टिकोण को बढ़ावा देना।
  • वर्ष 2030 तक एपीडा (APEDA) के अधिसूचित उत्पादों के 50 अरब अमेरिकी डॉलर के निर्यात लक्ष्य को प्राप्त करने हेतु निर्यात-तैयार उद्यमों का विकास करना।
  • उत्पाद विकास, गुणवत्ता मानकों, सतत विकास, लॉजिस्टिक्स तथा निर्यात अनुपालन संबंधी चुनौतियों का समाधान करना।

कौन आवेदन कर सकता है?

  • कृषि-खाद्य नवप्रवर्तक उद्यम।
  • एपीडा (APEDA) में पंजीकृत निर्यातक।
  • किसान उत्पादक कंपनियाँ ।
  • स्वच्छता एवं पादप स्वच्छता (Sanitary and Phytosanitary) समाधान पर कार्यरत नवप्रवर्तक एवं शोधकर्ता।

नवप्रवर्तक उद्यमों की पात्रता

  • यह संस्था(entity) प्राइवेट लिमिटेड कंपनी, LLP अथवा साझेदारी फर्म के रूप में पंजीकृत हो। पाँच वर्ष से अधिक पुरानी न हो।
  • किसी भी वित्तीय वर्ष में वार्षिक कारोबार ₹10 करोड़ से अधिक न हो।

प्रमुख विशेषताएँ

  • 700 से अधिक आवेदनों में से 100 नवप्रवर्तक उद्यमों का चयन किया गया।
  • 120 घंटे का निर्यात संवर्धन कार्यक्रम, जिसमें—निर्यात तैयारी,ब्रांड निर्माण,नियामकीय अनुपालन,व्यवसाय विस्तार,निवेशकों से संपर्क जैसे विषय शामिल हैं।
  • उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले नवप्रवर्तक उद्यमों को गल्फूड(Gulfood) 2026, दुबई में भाग लेने का अवसर प्रदान किया जाएगा।
  • इस कार्यक्रम में 17 से 75 वर्ष तक के उद्यमियों की भागीदारी को प्रोत्साहित किया गया है।

स्रोत: PIB

पद्म पुरस्कार

पाठ्यक्रम:विविध 

चर्चा में क्यों?

  • राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने राष्ट्रपति भवन, नई दिल्ली में आयोजित समारोह में 65 पद्म पुरस्कार प्रदान किए।

अतिरिक्त जानकारी

  • पद्म पुरस्कारों की घोषणा प्रतिवर्ष गणतंत्र दिवस के अवसर पर की जाती है।
  • वर्ष 2026 के लिए राष्ट्रपति ने कुल 131 पद्म पुरस्कारों को स्वीकृति प्रदान की, जिनमें—

5 पद्म विभूषण,13 पद्म भूषण,113 पद्म श्री शामिल हैं।

  • इससे पूर्व राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु 66 विशिष्ट व्यक्तियों को भी पद्म पुरस्कार प्रदान कर चुकी थीं।

पद्म पुरस्कार

  • वर्ष 1954 में स्थापित पद्म पुरस्कार भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मानों में से एक हैं। इन्हें तीन श्रेणियों में प्रदान किया जाता है—
  • पद्म विभूषण: भारत का दूसरा सर्वोच्च नागरिक सम्मान।
  • पद्म भूषण: भारत का तीसरा सर्वोच्च नागरिक सम्मान।
  • पद्म श्री: भारत का चौथा सर्वोच्च नागरिक सम्मान।
  • ये पुरस्कार कला, समाज सेवा, लोक-कार्य, विज्ञान एवं अभियांत्रिकी, व्यापार एवं उद्योग, चिकित्सा, साहित्य एवं शिक्षा, खेल तथा लोक सेवा सहित विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट योगदान के लिए प्रतिवर्ष प्रदान किए जाते हैं।
  • यह सम्मान जाति, व्यवसाय, पद अथवा लिंग की परवाह किए बिना सभी व्यक्तियों के लिए खुला है।
  • इन्हें मरणोपरांत भी प्रदान किया जा सकता है।

चयन प्रक्रिया

  • नामांकन निम्नलिखित स्रोतों से प्राप्त किए जाते हैं—राज्य सरकारें,केंद्रीय मंत्रालय,पूर्व पद्म पुरस्कार विजेता,आम नागरिक।
  • इनका परीक्षण प्रधानमंत्री द्वारा प्रतिवर्ष गठित पद्म पुरस्कार समिति करती है। समिति की अनुशंसाएँ प्रधानमंत्री एवं राष्ट्रपति के अनुमोदन हेतु भेजी जाती हैं।
क्या आप जानते हैं?
भारत रत्न, भारत का सर्वोच्च नागरिक सम्मान है, जो किसी भी क्षेत्र में असाधारण एवं सर्वोच्च स्तर की सेवा या उपलब्धि के लिए प्रदान किया जाता है तथा यह जाति, व्यवसाय, पद अथवा लिंग की परवाह किए बिना सभी व्यक्तियों के लिए उपलब्ध है।

स्रोत: PIB

 

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